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झरना मर्सिया गीत संग मना दसवीं आशूरा का पर्व 

झरना मर्सिया गीत संग मना दसवीं आशूरा का पर्व

झरना मर्सिया गीत संग मना दसवीं आशूरा का पर्व 

 

मुहर्रम पर्व पर जुलूस संग निकले ताजिये व कर्बला पर लगे मेले 

सोनू मोदनवाल

पीएम न्यूज सर्विस शिकारपुर, महराजगंज । सदर तहसील अंतर्गत शिकारपुर उपनगरीय परिक्षेत्र स्थित भिसवा, करमहा ,पकड़ी खुर्द,हरखपुरा-हड़तोड़हिया,गोपाला ,करमही, पुरैनाखंडी चौरा,हरपुर महंत ,रामपुर महुअवा स्थित कर्बलों पर लगे मेलों सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में गम व मातम की दसवीं आशूरा का पर्व मुहर्रम परंपरागत ढंग से झरना मर्सिया की मातमी गीत गाकर ,थकरी खेलकर,जुलूस निकालकर एवं ताजिए को कर्बला में दफना कर मनाया गया।

हजरत इमाम हुसैन, उनके बेटे ,घर वाले व 72 अन्य साथियों के इराक के कर्बला नामक स्थान पर बादशाह यजीद द्वारा क्रूरता पूर्वक हत्या किए जाने में हुए शहादत की याद में इस्लाम धर्म के नए साल की शुरुआत के महीने मुहर्रम के चांद निकलने की पहली तारीख को ही ताजिया रखे गए।

ताजिये को इराक स्थित इमाम हुसैन की दरगाह की हूबहू नकल कर बांस की कमाचियों को बांध कर उस पर रंग-बिरंगे कागज चिपकाकर हजरत इमाम हुसैन की याद में उनकी कब्र की निशानी के रूप में बनाया गया। सभी ताजियेदार ताजिए के सामने बैठकर झरना मर्शिया मातमी गीत गाकर मातम मनाए और आशूरा के आज दसवें दिन ताजियादारी किए ।

थकरी खेलते हुए जुलूस निकालकर ताजिये को लेकर कर्बला पहुंचे और उसे दफन किए।मुहर्रम का यह पर्व शिया व सुन्नी दोनों सम्प्रदायों के लोग अलग-अलग विधा से मनाए।जहां शिया मातम मनाते हुए अपने शरीर को तीर चाकुओं से घायल करते हुए,अंगारों पर नंगे पांव चलते हुए यह पर्व मनाए।

वहीं सुन्नी केवल शोक ही मनाए परंतु अपने शरीर को घायल नहीं किए।इनका मानना है कि खुद को घायल करने की इजाजतअल्लाह नहीं देते । भारत में मुहर्रम की शुरुआत तुर्की का रहने वाला इस्लामी आक्रांता दाएं हाथ व पैर से पंगु शिया मुसलमान तैमूर लंग ने किया था जो भारत ,पाकिस्तान, बांग्लादेश आदि देशों में प्रमुखता से मनाया जाता है।

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