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जिला अधिकारी के निर्देश का पुलिस प्रशासन ने किया निष्ठा से पालन, बन्द कराई किराने व सब्जी की दुकानें

  • छोटे दुकानदार की कैसे चलेगी जीविका, सरकार ने भी नही की अधिक मात्रा में लाचार व्यवसायिकों को चिन्हित
  • ग्रामीण इलाकों से लेकर सहारो तक कोरोना से पड़ा रोजगार श्रमिको पर बड़ा, जीविका खुद के चलाने के प्रति रो रहे खून के आँसू
  • छोटे वर्ग के व्यपारी, सुनार, वर्तन बेचने वाले, गुटखा पान मसाला, कपड़ा, आटा चक्की मसीन, सब्जी खेतो से लाकर बेचने वाले गरीब किसान, प्राइवेट वाहन यात्री को ले जाने वाले गरीब ड्राइबरो पर जीविका चलाने का पड़ा बुरा असर
  • कोरोना की जांच व भरपूर मात्रा में ग्रामीण इलाके के समुदायिक केंद्र पर कोई व्यवस्था तक नही
राजेश शुक्ला, प्रबंध सम्पादक

पीएम न्यूज़, देवरिया। आज बाजारो में आए छोटे दुकानदार जीविका चलाकर अपने परिवार का पालन पोषण करने वालो ने पत्रकार से अपनी दशा और आप बीती बताई। वही गांव के किसान व रोजगार करके पैसा कमाने वालों की दिन दशा खराब सुनी गई।सरकार के लिए गए फैसले को लेकर देश हित मे मोदी का कार्य सराहनीय है।
जिला प्रशासन के द्वारा उठाए गए कदम भी सराहनीय है । भयंकर महामारी से बचने के लिए एक मात्र उपाए घरों में बंद रहना ही उत्तम उपाय है। परन्तु इस सभी कार्य के प्रति अपनी घरों की जीविका के लिए कमाकर बच्चों को खिलाना भी एक अहम बात बनी हुई है।जिस बात को लेकर आज एक एक गांव के लोगो ने इस विषय पर अपनी राय देते नजर आए।
बतादे की छोटे वर्गो के शर्मिक जैसे, पान मसाला, ड्राइबर, छोटे सोनार, वर्तन फेरी वाले, ईट भठो पे कार्य करने वाले गरीब व्यक्ति, छोटे कपड़े के व्यपारी, चाय, , मिठाई बेचने वाले छोटे दुकानदार, इत्यादि, सभी आज भीष्म लाचारी के शिकार हो गए है। परिवार में सब्जी खरीदने तक कि कमाने की जरिया बन्द हो गई है।
यहां तक के गांव गांव में कर्फ्यू लग जाने से किसान सब्जियों के खेतों तक लुक छुप कर जाने के लिए विवस हो रहे है। ऐसे ने दो तीन घण्टे की छूट में सब्जी, फल, किराने के वितरक भी परेशानियों का सामना कर रहे है कि वे इतने कम समय मे कैसे सेवाओं को जनता के बीच पेस करे। दो से तीन घण्टे के बीच बाजारो में लोग आने से डर भी रहे है। सब्जियां सुख रही है।
लोगो को बाजार तक अधिक मात्रा में न पहुचने से बाजारो की हरी भरी सब्जियां सुख रही है। बड़े से बड़े महानगरो में राशन, सब्जी, की दुकान दिन भरी खुली सुनी जा रही है। ऐसे में जिला देवरिया का हाल अन्य स्थानो से ज्यादा प्रशासन की कड़ी नजर बनी हुई है। अस्पताल की व्यवस्था ग्रामीण इलाकों में विल्कुल लचीली बनी हुई है।
दवा, जांच की कोई व्यवस्था तक जिले के अधिकारियों के द्वारा पूर्ण रुप से नही की गई है। मोदी सरकार के द्वारा छोटे रोजमरा की जीविका चलाने वाले पर नजर गई नही है। घरों में बंद होकर बस सरकार के आदेश का पालन करने को मजबूर हो रहे है। ऐसे में यह चिंता का विषय जिला देवरिया के हर ब्लाक से सुनी जा रही है।
मोदी सरकार के द्वारा जारी घर घर राशन व खाने की सुविधायों को पहुचने का फैसला किया गया है, ऐसे में जब जेब मे रुपये नही रहेंगे तो फिर उस सेवा को ले पाना भी दुर्लभ स्थिती को दर्शाने का कार्य भी कर रही है।
जिसकी अपील आज जिला अधिकारी व एसपी के साथ जनता सरकार के करने के लिए मजबूर हुई है। ऐसे स्थियो का सामना कैसे लंबे समय तक कि जा सकती है। फिर भी जनता भूखे पेट सरकार के लिए गए निर्णय को अपना भगवान समझकर माने के लिए मिल जुलकर इस बुरे समय में खड़ी है।

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