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ब्रह्मचारिणी के पूजन कर कोरोना वायरस से छूटकारा की मांगी मन्नत

  • घंटा-घटियाल व देवी जयकारों से गुंजायमान रहे मंदिर
राजेश शुक्ला, प्रबंध सम्पादक

पीएम न्यूज़, उरई। नवरात्र के द्वितीय दिवस के दिन भक्तों ने अपने अपने घरों पर भक्ति भाव से देवी के द्वितीय स्वरूप ब्रह्मचारिणी की विधि विधान से पूजा अर्चना की। साथ ही दरवार में माथा टेक कर कोरोना वायरस नष्ट होने एवं सुख समृद्धि की प्रार्थना की। जनपद मे लाॅकडाउन होने के कारण लोगों को घरों से निकलने की अनुमति न होने के चलते लोग मातारानी की घरों पर ही आराधना करते नजर आये।
नवरात्र के दूसरे दिन गुरूवार को देवी भक्तों ने अपने अपने घरों पर ही बैठकर देवी के द्वितीय स्वरूप ब्रह्मचारिणी की विधि विधान से पूजा अर्चना की। भक्तों ने भक्ति भाव के साथ देवी ब्रह्मचारणी को फल-फूल, पान, बतासा आदि सामग्री देवी चरणों में अर्पित की तथा मत्था टेककर कोरोना वायरस से छुटकारा पाने के लिये एवं सुख समृद्धि की कामना की।
हालांकि शहर क्षेत्र मे स्थापित बड़ी माता मंदिर, संकटा मंदिर, शीतला मंदिर, हुल्का माता मंदिर में लाॅकडाउन का असर देखने को मिला। भक्तों ने प्रधानमंत्री की अपील का पालन करते हुये सभी मंदिरों को बंद रखा गया। जिससे बाहरी लोग मंदिरों मे नही पहुंच सके, सिर्फ मंदिरों मे पूजारी द्वारा ही पूजा-अर्चना की।

सभी मंदिरों के कपाट रहे बंद, घरों पर की लोगों ने पूजा

चैत्र मास की नवरात्रि के दूसरे दिन भक्तों ने घर में ही देवी मां के दूसरे स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा अर्चना की। कोरोना वायरस के संक्रमण के चलते नवरात्रि के पर्व पर भी सभी देवी मंदिरों के कपाट बंद रहे। लोग धर्म से ऊपर उठकर सरकार का सहयोग कर रहे हैं। इस बार लोग नवरात्रि का पर्व अपने घरों में ही मना रहे हैं।
मां शक्ति के दूसरे स्वरूप ब्रह्मचारिणी देवी की पूजा नवरात्रि के दूसरे दिन भक्तों ने अपने-अपने घरों में ही की। भक्तों ने घरों में विराजमान देवी मां को रोली, चंदन, नारियल आदि चढ़ाकर पूजा अर्चना की। पं. अरविंद बाजपेई बताते हैं कि मां के ब्रह्मचारिणी नाम के पीछे देवी श्रीमद् भागवत पुराण में एक रोचक कथा है।
जब मां शक्ति ने राजा हिमालय के घर पुत्री के रूप में जन्म लिया और भगवान शिव को वर स्वरूप पाने के लिए तपस्या की। देवी की तपस्वी स्वरूप के कारण ही इनका नाम बह्मचारिणी और तपश्चारिणी हुआ। मां का स्वरूप देवी सरस्वती का भी रूप माना गया है। इसलिए इनकी साधना और पूजा छात्रों के लिए बहुत भी लाभप्रद कहा जाता है। इनकी साधना से मेधा शक्ति और ज्ञान की प्राप्ति होती है।

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