जानलेवा हो सकता है हीट स्‍ट्रोक (लू)

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सावधानी बरतें नहीं तो जानलेवा हो सकता है हीट स्‍ट्रोक (लू)

 

–   सीएमओ ने जिले के नागरिकों को लू से बचने के लिए सुझाए उपाय (संतकबीरनगर से अमित प्रताप मिश्र की रिपोर्ट )

–   उपायों पर अमल करें जिले के लोग, तेजी से बढ़ रहा है सन स्‍ट्रोक का खतरा

संतकबीरनगर।जिले में बढ़ती गर्मी को लेकर चिकित्‍सा विभाग पूरी तरह से हरकत में आ गया है। जिले के सीएमओ डॉ हरगोविन्‍द सिंह ने जिले के निवासियों को हीट स्‍ट्रोक (लू) से बचने के लिए कई उपाय सुझाए हैं। उन्‍होने अपील किया है कि लोग बताए गए इन उपायों पर अमल करें तो जानलेवा हीट स्‍ट्रोक से खुद तो बच सकते ही हैं, दूसरों की जान बचा भी सकते हैं।
सीएमओ डॉ हरगोविन्‍द सिंह ने बताया कि गर्मी में सबसे बड़ी समस्‍या लू लगने की होती है। इसे हीट स्‍ट्रोक या सन स्‍ट्रोक भी कहते हैं। गर्मी में उच्‍च तापमान में ज्‍यादा देर तक रहने से या गर्म हवा के झोंकों के सम्‍पर्क में आने पर लू लगने का खतरा रहता है। अगर इसे नजरंदाज किया जाता है तो यह जानलेवा भी हो सकता है। शराब के लती, हृदय रोग, पुरानी बीमारियो और मोटापा से ग्रसित लोग तथा अधिक उम्र में बढ़ता हुआ मधुमेह तथा कुछ मानसिक रोग की औषधियां भी इसके लिए जिम्‍मेदार हैं। अगर शरीर गर्म लाल, त्‍वचा शुष्‍क हो, पसीना न आए, धड़कनें तेज हो जाएं, श्‍वास जल्‍दी जल्‍दी आए, सिर दर्द , मितली, थकान आदि हो, मूत्र न निकले तो समझ लेना चाहिए कि हीट स्‍ट्रोक हो गया है। इससे शरीर के आन्‍तरिक अंगों को नुकसान तो पहुंचता ही है, रक्‍तचाप भी बढ़ता है, जिसके चलते मस्तिष्‍क क्षतिग्रस्‍त होने का खतरा बना रहता है। इससे लोगों की मौत भी हो सकती है। इसलिए इससे बचना अति आवश्‍यक है। इसका इलाज करने के लिए आवश्‍यक दवाएं व ओआरएस घोल पर्याप्‍त मात्रा में हर स्‍वास्‍थ्‍य केन्‍द्र पर उपलब्ध है।
 मौसमी फलों और कच्‍चे आम का रस पीयें
मौसमी फलों का रस और कच्‍चे आम का पना हीट स्‍ट्रोक से बचाता है। नारियल पानी के साथ ही ओआरएस घोल का प्रयोग करें। साथ ही साथ पर्याप्‍त मात्रा में पानी पिये, 24 घण्‍टे में 3 से 4 लीटर पानी का सेवन करें। छाता या टोपी लगाकर निकलें तथा पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें।
 गर्मी से बचने के लिए न पीएं शीतल पेय
हीट स्‍ट्रोक से बचने के लिए दोपहर 12 बजे से शाम 3 बजे तक के बीच सूर्य की सीधी रोशनी में जाने से बचें। शराब, चाय, काफी, कार्बोहाइड्रेट साफ्ट ड्रिंक आदि का प्रयोग करने से बचें क्‍योंकि यह डिहाइड्रेशन का कारण बनता है। गहरे रंग के भारी तथा तंग कपड़े न पहनें। जब बाहर तापमान अधिक हो तो ज्‍यादा श्रम वाला कार्य न करें। अधिक गर्मी वाले समय में अधिक भोजन करने से बचें।
 मरीजों के लिए प्राथमिक उपचार
अगर कोई हीट स्‍ट्रोक से बेहोश होता है या गिरता है तो उसे सबसे पहले छांव में लाएं तथा उसके लिए हवा का इन्‍तजाम करें। उसके शरीर को कोल्‍ड स्‍पंज या गीले कपड़े से पोछें, उसे ठण्‍डे पानी के टब में रखें और उसके सर पर बर्फ की पट्टी करें। जब तक उसका तापमान 100 डिग्री फारेनहाइट न हो जाए। निर्जलीकरण की स्थिति में आईवी फ्लूड्स दें। गंभीर स्थिति देखें तो तुरन्‍त ही 108 एम्‍बुलेन्‍स की सहायता से उसे स्‍थानीय चिकित्‍सालय पहुंचाएं। 

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