बस्ती से विकास पाण्डेय की रिपोर्ट

इस सीट पर रोड बना चुनावी मुद्दा, नाराज ग्रामीणों ने कहा इस गांव में आए नेता तो बरसेगा पत्थर

सरकार की कई महत्वपूर्ण व जनहित योजनाओं के नाम पर इस गांव के ग्रामीणों को अभी तक केवल ठगा गया है
बस्ती. आजादी के 70 साल बीत गये, कई सरकारे आयी और चली गयी लेकिन विकास किस चिडिय़ा का नाम है इसका पता बस्ती जिले के गोण्डा बॉर्डर से सटे 14 पुरेवा मानपुर मांझा के ग्रामीण को अब तक नहीं पता है। इस गांव में न सडक है, न अस्पताल, न शौचालय और न राशन की लोगों को सुविधा है।

सरकार की कई महत्वपूर्ण व जनहित योजनाओं के नाम पर इस गांव के ग्रामीणों को अभी तक केवल ठगा गया है और तो और इन ग्रामीणों के साथ सौतेला व्यवहार बस्ती के प्रतिनिधियों द्वारा किया गया है जब मानापुर मांझा गांव के ग्रामीण राजनेताओं से गुहार लगा कर थक गये तब इन लोगों ने आगामी 2019 की लोकसभा चुनाव का बहिष्कार करने का मन बना लिया। जगह- जगह होर्डिंग व पोस्टर चिपका दिये हैं। रोड नहीं तो वोट नहीं, ग्रामीणों मे काफी रोष व्याप्त है। ग्रामीणों का आरोप है कि किसी भी पार्टी के नेता को गांव में वोट मांगने के लिए तब तक प्रवेश नहीं करने देगें जब तक हमारे लिये रोड नहीं बन जाती हैं ।

गौरतलब है कि सरकार के सबका साथ सबका विकास के इस दावें की पोल ग्रामीण खुद खोल रहे हैं, गांव में 70 साल के बाद भी पूरी तरह से विकास की किरण अभी तक नहीं पहुंच पाई है, ग्रामीण जगह जगह नए तरीके से विरोध कर रहे हैं, मीडिया की टीम गांव में विकास का जायजा लेने के लिए पहुंची तो ग्रामीण इकट्ठा होकर रोड नहीं तो वोट नहीं के नारे सहित प्रशासन के खिलाफ भी विरोध प्रकट किया।

ग्रामीणों ने कहा कि आजादी के 70 साल बीत जाने के बाद भी हमारे गांव में एक रोड तक नहीं बन पाया तो हमारे गांव में और विकास कैसे होगा, इसलिए हम सब ग्रामीण मिलकर 2019 लोकसभा चुनाव का बहिष्कार करेंगे और किसी भी दल के नेता को गांव में नहीं घुसने देंगे, अगर गांव में किसी दल के नेता घुसने का प्रयास करेंगे तो पत्थर बाजी कर गांव से खदेड़ने का भी काम करेंगे, हम गांव वाले खुद तो चुनाव का बहिष्कार करेंगे और आस-पास के गांव में जो इस रोड के किनारे बसे हैं उनसे चुनाव बहिष्कार का समर्थन मांगेंगे जब तक हमारे गांव का रोड नहीं बन जाएगा तब तक हम लोग चुनाव में हिस्सा नहीं लेंगे । एक तरफ सरकार चुनावों में मतदाताओं की संख्या बढ़ाने के लिए तरह-तरह के प्रयास कर मतदाताओं की संख्या बढ़ाने की कोशिश कर रही है वहीं दूसरी तरफ ग्रामीण चुनाव का बहिष्कार कर रहे हैं ऐसे में 2019 लोकसभा चुनाव कैसे मतदाताओं की संख्या बढ़ेगी यह अपने आप में एक सबसे बड़ा सवाल खडा कर रहा है।

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