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(पीएम) संवाददाता कुशीनगर । कुशीनगर जनपद के छितौनी-बगहा पुल के निकट पनियहवा घाट, खड्डा से पांच किमी उत्तर भैंसहा घाट का विकास पर्यटन स्थल के रूप में हो सकता है। प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण नदी उस पार के आधा दर्जन गांवों में पर्यटन विकास की असीम संभावनाएं हैं। यहां आने वाले सैलानी बड़ी गंडक में जलमार्ग विकसित होने से खड्डा सहित सीमावर्ती बिहार में पर्यटन को पंख लगेगा। शनिवार को स्टीमर से सर्वे करने आई टीम को देख इस इलाके के लोग उत्साहित हैं तो उम्मीद परवान चढ़ने लगी है।

वाल्मीकिनगर टाइगर रिजर्व के जंगल में बाघ, हिरण, भालू आदि जानवरों को देख सकेंगे तो पड़ोसी देश नेपाल तक की यात्रा का लुत्फ उठाया जा सकेगा। बड़ी गंडक के वाल्मीकिनगर से लेकर कुशीनगर जनपद की सीमा में मिलने वाली चेपुआ मछली तो नदी उस पार रेता इलाके की दही भी पर्यटकों को आकर्षित करेगी।

नदी के दोआब की हरियाली व सीमावर्ती बिहार प्रांत का वीटीआर की प्राकृतिक छटा पर्यटन की दृष्टि से बेहतर साबित होगी।विधायक जटाशंकर त्रिपाठी ने बीते 24 जनवरी 2018 को इस जलमार्ग को विकसित करने की मांग केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से मिल कर की थी।

उसके बाद इस कार्य में तेजी आई और सर्वे शुरू गया। सर्वे के लिए विभाग ने नदी में स्टीमर भी उतार दिया है। जलमार्ग बनाने में एक वर्ष लगेगा  -प्रोजेक्ट निदेशक एसके ¨सह ने कहा कि सबकुछ ठीकठाक रहा तो नारायणी में जलमार्ग विकसित करने में एक वर्ष का समय लगेगा। पटना से वाल्मीकिनगर बैराज की दूरी करीब 300 किमी है। मार्ग बनने पर यात्री व मालवाहक जहाज चलाए जा सकेंगे।

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