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(पीएम) संवाददाता   खेतों में इन लाल-सफेद फूलों को देखकर आपको लगेगा कि फूलों की खेती की गई है। पर ये गुलाब जैसे दिखने वाले फूल जिंदगी में सुगंध नहीं नशा बिखेरने का काम करते हैं। खूंटी जिले के जंगलों में अफीम के लिए पोस्ते की फसल बड़े पैमाने पर अवैध तरीके से उगाई जाती है। पुलिस सूचना मिलने पर इन पौधों को हर बार नष्ट कर करती है तो नशे के कारोबारी हर बार इन्हें अलग-अलग जगहों पर उगा लेते हैं।

पहली बार नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के अधिकारी अभियान में शामिल हुए पहली बार जिले के कर्रा प्रखंड क्षेत्र में अफीम की खेती करने के मामले सामने आए हैं। एक दिन पहले पुलिस ने कर्रा के पहाड़टोली में अफीम की फसल नष्ट की, तो अगले दिन कर्रा के जरियागढ़ थाना अंतर्गत

तिलमी चुटियाटोली में पुलिस ने दो एकड़ में लगे अफीम के पौधों को नष्ट करने का काम किया। इधर खूंटी जिले के मारंगहादा थाने की पुलिस ने अफीम के खिलाफ व्यापक पैमाने पर अभियान चलाया है। पहली बार ऐसा हुआ है जब नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के अधिकारी भी इस अभियान में शामिल हुए हैं।

जिले के एसडीपीओ कुलदीप कुमार, मुख्यालय डीएसपी विकास आनंद लागूरी, मारंगहादा थानेदार पप्पू शर्मा, सोयको थोनदार उमाशंकर समेत काफी संख्या में पुलिस बल के साथ एनसीबी इंटेलिजेंस, रांची के ऑफिसर राहुल कुमार त्रिपाठी की पूरी टीम मारंगहादा थाना क्षेत्र के लांदूप पंचायत अंतर्गत दुलमी गांव पहुंची। दुलमी गांव में की गई अफीम की खेती लहलहा रही थी। पौधे बड़े हो चुके थे।
दूर-दूर तक अफीम के सफेद और लाल फूल दिखाई पड़ रहे थे। पुलिस और एनसीबी की टीम ने संयुक्त रूप से कार्रवाई करते हुए जिले में पहली बार ग्रास कटर मशीन का इस्तेमाल करते हुए लगभग आठ एकड़ में लगे अफीम की फसल को नष्ट कर डाला है। पुलिस के अनुसार अफीम की खेती करने वालों को चिन्हित किया जा रहा है। उनकी पहचान होते ही उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर लिया जाएगा।
मुरहू थाना क्षेत्र के गांव में भी अफीम के खिलाफ अभियान चलाया गया। थानेदार उदय कुमार गुप्ता के नेतृत्व में पेरका गांव में लगे अफीम की फसल को नष्ट किया गया। इधर प्रशासन अफीम की खेती के खिलाफ अभियान को तेज करने के लिए नए-नए तरीकों का इस्तेमाल करने पर विचार कर रही है।

सूत्रों की मानें तो जंगलों में लगे अफीम के खेतों में जैसे ही फूल लगने लगेंगे, ड्रोन कैमरे के इस्तेमाल से अफीम के खेतों का पता लगाया जाएगा और व्यापक पैमाने पर अभियान चलाते हुए फसलों को नष्ट करने के साथ खेती करने वालों के खिलाफ केस भी दर्ज किये जाऐंगे।

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