सूर्य उपासना का महापर्व हैं छठ, तैयारियां जोरों पर

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सूर्य उपासना का महापर्व हैं छठ, तैयारियां जोरों पर
पीएम न्यूज सर्विस महराजगंज। कार्तिक मास में शुक्ल पक्ष में षष्ठी तिथि को छठ का महापर्व मनाया जाता है। कार्तिक मास में सूर्य अपनी नीच राशि में होता है। इसलिए सूर्य देव की विशेष उपासना की जाती है ताकि स्वास्थ्य की समस्याएं परेशान न करें। षष्ठी तिथि का संबंध संतान की आयु से होता है और सूर्य भी ज्योतिष में संतान से संबंध रखता है। इसलिए
सूर्य देव की षष्ठी पूजा से संतान प्राप्ति और और उसकी आयु रक्षा दोनों हो जाती है। इस बार छठ पर्व 18 नवंबर से 21 नवंबर तक चलेगा। यह पर्व चार दिनों तक चलता है। इसकी शुरुआत कार्तिक शुक्ल चतुर्थी से होती है और सप्तमी को अरुण वेला में इस व्रत का समापन होता है। कार्तिक शुक्ल चतुर्थी को नहाए.खाए के साथ इस व्रत की शुरुआत होती है।
इस दिन से स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जाता है। दूसरे दिन को लोहंडा.खरना कहा जाता है। इस दिन दिन भर उपवास रखकर शाम को खीर का सेवन किया जाता है। खीर गन्ने के रस की बनी होती है। तीसरे दिन दिन भर उपवास रखकर डूबते हुए सूर्य को अघ्र्य दिया जाता है। अघ्र्य दूध और जल से दिया जाता है।
चौथे दिन बिल्कुल उगते हुए सूर्य को अंतिम अघ्र्य दिया जाता है। इसके बाद कच्चे दूध और प्रसाद को खाकर व्रत का समापन किया जाता है। पहला दिन नहाय खाय 18 नवंबर दिन बुधवार व्रत रखने महिलाएं स्नान करने के बाद नए वस्त्र धारण करती हैं।
दूसरा दिन खरना 19 नवंबर दिन गुरुवार कार्तिक शुक्ल पंचमी को महिलाएं पूरे दिन व्रत रखती हैं और शाम को भोजन करती हैं। शाम को चाव व गुड़ से खीर बनाकर खाई जाती है। तीसरे दिन षष्ठी के दिन इस दिन छठ पर्व का प्रसाद बनाया जाता है। अधिकांश स्थानों पर चावल के लड्डू बनाए जाते हैं।
प्रसाद व फल बांस की टोकरी में सजाये जाते हैं। टोकरी की पूजा की जाती है। व्रत रखने वाली महिलाएं सूर्य को अर्ग देने और पूजा के लिए तालाब, नदी या घाट पर जाती हैं। स्नान कर डूबते सूर्य की पूजा की जाती है।

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