धनतेरस के दिन दिव्य कलश के साथ प्रकट हुए भगवान धन्वंतरि

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धनतेरस पर विशेष
धनतेरस के दिन दिव्य कलश के साथ प्रकट हुए भगवान धन्वंतरि
निधि द्विवेदी
पीएम न्यूज सर्विस । धनतेरस के दिन समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि एक दिव्य कलश लेकर प्रकट हुए थे , जिसमें औषधियों का भंडार था इसलिए इस दिन को आरोग्य दिवस के रुप में भी मनाया जाता है। इस दिन औषधि बर्तन खरीदनी चाहिए। चांदी का बर्तन शुभ होता है ।चांदी न हो सके तो पीतल के बर्तन खरीदना चाहिए लक्ष्मी के लिए झाड़ू शुभ माना जाता है।
इसलिए इस दिन झाड़ू भी खरीदना चाहिए। इससे दरिद्रता नहीं होती। लक्ष्मी गणेश की मूर्ति भी इसी दिन खरीदना चाहिए। इस बार इस वर्ष गुरुवार की शाम 6:32 से यह तिथि लग रही है। इसके बाद खरीदारी करनी चाहिए।
अगले दिन शुक्रवार को सूर्योदय में त्रयोदशी होने के नाते इस दिन भी खरीदारी कर सकते हैं। वैसे गुरुवार की शाम 6:32 से 7:30 बजे तक विशेष खरीदारी के लग्न है। ध्यान दें मूर्ति खड़ी मुद्रा मी में नहीं लेना चाहिए अर्थात हमेशा मूर्ति बैठी हुई मुद्रा में लें यह भी ध्यान देना चाहिए कि केवल लक्ष्मी का मूर्ति नहीं लेना चाहिए लक्ष्मी जी के साथ गणेश जी या सरस्वती जी का मूर्ति होना चाहिए ताकि
लक्ष्मी के साथ सरस्वती का भी समावेश हो और पूजन करें धन के साथ ज्ञान भी रहे ।यह भी मूर्ति खरीदते समय ध्यान दें कि क्रोधित मुद्रा वाली मूर्ति न लें , कंगाली का प्रतीक माना जाता है ।हमेशा चेहरे पर मुस्कान वाली मूर्ति लें ।यह भी
ध्यान दें कि लक्ष्मी के हाथों से सिक्के गिरने वाली मूर्ति लें तो सिक्के किसी पात्र में गिर रही हो न कि जमीन पर। पात्र में सिक्के गिरने वाली मूर्ति से घर में धन वर्षा होगी और जमीन पर सिक्के गिरने वाली मूर्ति से धन का नुकसान होता है कंगाली आती है इसलिए यदि सिक्के वाली मूर्ति लेनी है तो
लक्ष्मी जी के हाथ से पात्र में सिक्के गिराने वाली मूर्ति लेनी चाहिए।

द्वादशी तिथि को कामधेनु प्राकट्य हुई थी,इसलिए आज गुरुवार को गाय को मीठा भोजन कराकर पूजा करना चाहिए। धनतेरस को धन्वंतरि प्रकट हुए थे। वस्त्र खरीदना हो तो सफेद खरीदे, चतुर्दशी को महाकाली और अमावस्या को लक्ष्मी प्राकट्य हुई थी,उस दिन उनकी पूजा करनी चाहिए।

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