सवाल के घेरे में चिकित्सक, नसबंदी के बाद महिला हुई प्रेग्नेंट

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सवाल के घेरे में चिकित्सक, नसबंदी के बाद महिला हुई प्रेग्नेंट
सुनील शर्मा 
पीएम न्यूज सर्विस रतनपुर महराजगंज । नौतनवा विकास खंड के रामगढ़वा गांव का निवासी रमेश खासा परेशान है। खेती-बाड़ी ना के बराबर है। रमेश मेहनत मजदूरी से अपनी पत्नी व चार बच्चों का पेट पालता है। पछतावा भी है कि चार बच्चे न होते तो बोझ ना होता।
पीडित ने बताया कि बीते ठंड के मौसम में वह अपनी 28 वर्षीय पत्नी गुड़िया की नसबंदी कराने रतनपुर स्वास्थ्य केंद्र पहुंचा। उसके गांव की आशा कार्यकर्ता मंजू उसे साथ लेकर अस्पताल गयी। चिकित्सक ने ऑपरेशन कर गुड़िया की नसबंदी कर दी परिवारिक बोझ से राहत मिलने से
रमेश अब सुकून में था।
मन में चार बच्चों के परवरिश का उसे जज्बा था। जिसकी जुगत में वह जुट गया था।
नसबंदी के कुछ माह बाद उसकी पत्नी गुड़िया की तबियत कुछ खराब हुई तो वह इलाज कराने अस्पताल पहुंचा। अल्ट्रासाउंड में पता चला कि गुड़िया गर्भवती है। उसके पेट में करीब छह माह का बच्चा है।
उक्त बातें सुनकर रमेश आवाक रह गया और नसबंदी भी काम ना आई। रमेश चार बच्चों के परवरिश में परेशान है। उसने नसबंदी कराया कि पांचवा बच्चा ना पैदा हो जाय फिर भी अनहोनी हो गई। गलती तो डॉक्टर ने की। नसबंदी के बाद भी बच्चा ठहर गया अपनी शिकायत लेकर वह
रतनपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चक्कर काट रहा है। रमेश ने समुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंच कर डाक्टर से बोला कि आप लोगों ने ए कैसा नसबंदी किया कि फिर से बच्चा रुक गया।
रमेश के इस सवाल पर चिकित्सकों की सफाई टेक्निकल है।
आशा मंजू भी बारीक तर्क दे रही हैं
कि गर्भ नसबंदी के पहले का ठहरा हुआ है। सवाल यह उठा कि नसबंदी करने से पहले प्रेगनेंसी टेस्ट करने का प्राविधान नहीं है क्या और यह भी नसबंदी कराने आई महिलाओं के लिए नसबंदी से पूर्व कुछ दिनों कि सचेतक गाइड लाइन है कि नहीं अगर नसबंदी के बाद गर्भ ठहराव होता है तो गलती किसकी है।
मामले की जांच शुरू हो गई है रमेश व उसकी पत्नी को रतनपुर अस्पताल पर बुलाया गया है।

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