मलुकही बाजार, कुशीनगर। भारत देश का रीढ़ समझे जाने वाला किसान प्रकृति की मार तथा नेताओं की नेता गिरी में फस कर अपनी दुर्दसा पर आँसू बहाने व आत्म हत्त्या करने को विवश होता दिखाई दे रहा है वहीं सरकार के द्वारा किसान हित में  जारी किए जाने वाले अनेक कामो का झूठा ढिढोरा पीटा जा रहा है
उल्लेखनीय है कि भारत में किसानो को देश का रीढ़ कहा जाता है परंतु देश का रीढ़ समझे जाने वाला यह। किसान महगाई से जहॉं त्रस्त है वहीं इन के सामने असुविधाओं का भी टोटा है दिखाई देरहा है मालूम हो की सूखे  तथा बाढ़ की मार झेल रहा किसान जहॉं अपने फसल को देख कर आँसू बहाने को विवश है वहीं किसानों के हित में सरकार के द्वारा किया जाने वाला घोषणा हवा हवाई साबित होरहा है खेती से परेशान किसानों आदित्य , मानिक चन्द गुप्ता रणजीत बहादुर मल आदि किसानों  ने बताया कि खेती अब घाटे का सौदा होकर रह गया है सरकार की घोषणा हवा हवाई साबित हो रही है और प्रकृति की मार अलग से झेलना पड़ता है ऐसे में खेती करना बहुत ही टेढा साबित हो रहा है|.                                                        

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